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तिथि, समय, पूजा विधि, व्रत कथा और आध्यात्मिक लाभ
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वरुथिनी एकादशी, जो 13 अप्रैल 2026 को पड़ रही है, हिंदू कैलेंडर के सबसे सुरक्षात्मक और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली व्रतों में से एक मानी जाती है। "वरुथिनी" नाम संस्कृत शब्द वरुथ से आया है, जिसका अर्थ है दिव्य कवच, जो भक्त को नकारात्मकता और पिछले जन्मों के पापों से बचाता है।
📅 वरुथिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और समय
व्रत का सही पालन करने के लिए, इन विशिष्ट तिथि और पारण समय का पालन करें:
| घटना | दिनांक और समय (IST) |
| व्रत तिथि | सोमवार, 13 अप्रैल 2026 |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 13 अप्रैल 2026, रात्रि 1:16 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 14 अप्रैल 2026, रात्रि 1:08 बजे |
| ब्रह्म मुहूर्त (पूजा) | सुबह 4:51 – 5:37 (13 अप्रैल) |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12:14 – 1:04 (13 अप्रैल) |
| पारण (व्रत तोड़ना) | 14 अप्रैल 2026 — सुबह 6:54 से 8:53 तक |
पारण के लिए महत्वपूर्ण सूचना: आपको 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे हरि वासर अवधि समाप्त होने से पहले व्रत नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना आध्यात्मिक रूप से अनुचित माना जाता है।
🌟 आध्यात्मिक महत्व
भविष्य पुराण में, भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया कि यह व्रत स्वर्ण का हाथी दान करने या वर्षों तक कठिन तपस्या करने के समान फल देता है।
इस व्रत के पालन के लिए मन और शरीर के कड़े अनुशासन की आवश्यकता होती है:
🪔 पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
पूजा के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त है।
📖 व्रत कथा: राजा मांधाता
मुख्य कथा राजा मांधाता की है, जो एक धर्मपरायण शासक थे, लेकिन पिछले कर्मों के कारण उन्होंने अपना गौरव और धन खो दिया था। अंगिरस ऋषि की सलाह पर, राजा ने भगवान वामन के प्रति पूर्ण भक्ति के साथ वरुथिनी एकादशी का व्रत किया। उनके पाप नष्ट हो गए, उनकी समृद्धि वापस आ गई और अंततः उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया।
🪐 ज्योतिषीय महत्व
2026 में, यह एकादशी सूर्य के मेष राशि में गोचर के साथ मेल खाती है, जो आध्यात्मिक साहस को बढ़ाती है। यह निम्नलिखित के लिए एक शक्तिशाली ज्योतिषीय उपाय है:

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एक वैदिक ज्योतिषी और ANKYOTISSH — द साइंस ऑफ कॉस्मिक सेल्फ के संस्थापक हैं